Anjuman May Meetup : अंजुमन (हिंदी एवं उर्दू शायरी मंच)– 22 मई, 2016

Anjuman: Hindi Urdu Poetry Club in Bangalore

Date/ दिनाक: 22-05-2016 / २२ – ०५ – २०१६
Venue/ स्थान: Atta Galatta
#134, KHB Colony, 5th Block, Koramangala, Bangalore, India 560095
Event description/अंजुमन की इसं संध्या का बारें मैं :

आइये एक और अंजुमन सजाते है। कविताएँ सुनते हैं और सुनाते है, आप सभी आमंत्रित है इस अंजुमन में।

हर बार की तरह इस बार भी अंजुमन को कामयाब बनाने में हम आपका सहयोग चाहेंगे. कुछ बातें, जिन से हमें अंजुमन को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी और आप भी इस का अधिक आनंद उठा पायेंगे।

१. हम किसी ख़ास विषय या कवि को लेकर अंजुमन नहीं कर रहे हैं, लेकिन अगर आप चाहें तो अपने किसी भी पसंदीदा कवि की रचना सुना सकते हैं. अगर आप किसी और की रचना पढ़ रहे हैं तो, कवि/शायर का नाम बताना ना भूलें.
२. आप की मौलिक रचनाओं का हार्दिक स्वागत है.
३. रचनायें हिन्दी-उर्दू में ही होनी चाहिए
४. अगर आप अपनी कविताओं का अभिनय करना चाहें, तो आप स्वतंत्र हैं. आप की रचनायें पहले से ही स्वीकृत हैं| आप का मंच है, आप जैसे चाहें इस्तमाल कर सकते हैं.
५. हर रचनाकार को १० मिनिट का समय दिया जायेगा. अपने समय में आप कई छोटी कवितायें/नज़्में/ग़ज़लें पढ़ सकते हैं या एक लम्बी कविता/नज़्म/ग़ज़ल.

Event summary
आज मैं बड़ा ही उत्साहित था, क्यूंकि काफी मुश्किलों के बाद मुझे अंजुमन की संध्या में कुछ सुनाने का अवसर मिला हैं| यह संध्या मेरे लिए इसलिए भी महतवपूर्ण थी, क्यूंकि ९ से १० वर्षा पश्चात मैं पूर्णतया हिंदी में लिख पाया हूँ|

आज मंच का सञ्चालन संदीप शिखर जी ने किया| उनके बारें मैं काफी कुच्छ सुना तो था, पर आज ठीक से सुन भी लिया| मंच सञ्चालन के अलावा बिच बिच मैं उन्होंने हस्सी भरे कुछ फवारें भी छोड़ दिए, इससे सभी का उत्साहवर्धन भी हुआ|

आज के पहले कवि अन्जेश मित्तल था| इनके काव्य पाठ की एक पंक्ति मुझे अच्छे से याद रह गयी हैं| “तुम भी हवा के बुलबुल और हम भी हवा के बुलबुले ”

ओं अली जाहिद साहब ने काफी सारें पुराने शःयरों को अपने ही अंदाज मैं जवाब दिया| इसके बाद आयें कवि दिवस ने एक लम्बी नजम प्रस्तुत की जिसमें उन्होंने एक इंसान के आत्मावलोकन के बारें मैं बताया|

अतुल जैन जी ने तिन कवितायेँ प्रस्तुत की| प्रथम कविता मैं उन्होंने एअरपोर्ट पर होने वाले इंतज़ार के बारें में बताया| दितीय कविता मैं उन्होंने उन शब्दों की बात की हैं, जो पत्रों मैं लिखे गए हैं| तृतीय कविता मैं उन्होंने आकाश, बारिश और धरती के बिच के रिश्ते को बारिश की बूदों के सहारे समझाने की कोशिश की|

सौरव रॉय जी ने सर्वप्रथम नए आये मेह्मानो के समक्ष कर्न्कविता पुस्तक के बारें मैं बताया| उनकी प्रथम कविता का शीर्षक ‘मैं सुनना चाहता हूँ’| दितीय कविता की भूमिका कुच्छ दिलचस्प थी| पिच्च्ली तिन पीड़ी से उनके परिवार ने रेलवे मैं कार्य किया हैं, तो काफी यादें उससे जुडी हुए हैं| उनकी कविता का शीर्षक ‘दादू और रेलवे के किस्से’ था| इसकी आखिरी पंक्ति काफी यादगार थी
“और मुझे मिलने लगी हैं रेलवे के बहाने जागने की ताक़त”

अगले आये कवि प्रशांत जी प्रथम बार अंजुमन मैं पधारे थे| उनकी कविता की एक पंक्ति दिल को चुन गयी,

“लब्ज डर बदर बेईमानी रूठ रही हैं”

ब्रिजेश देशपांडे जी को मैं काफी समय से सुन रहा हूँ, और इनकी कविताओ मैं काफी गहरा रिश्ता छुपा होता हैं| उनकी कविताओं मुझे रिश्तो की सम्जः नहीं हैं और कांच के टुकडो का पत्थर ने उन रिश्तो के मर्म को फिर से छुआ| दो पंक्तिया मैं कहना चाहूँगा

“जाने क्यूँ लोग ऐसे काम कर जाते हैं
कुछ लोग जीते जी मर जाते हैं ”

कवि उत्तम तिवारी जी ने सूरज और दीपक की तुलना, एवं उन समस्त महिलाओं की पीड़ा को शब्दों के सहारे बताने की कोशिश की, जिन्होंने काफी कुच्छ किया पर उन्हें वो मान सम्मान नहीं मिला|
मशहूर शायर फैज़ अकरम जी फिर से अपनी संवेदनशील नज़मों से आस पास घटी कुछ घटनाओं के बारें मैं सोचने को मजबूर कर दिया|

अमित रॉय जी का भी यह प्रथम बार अंजुमन था| उन्होंने पांच छोटी छोटी कवितायेँ ‘चाय की वो प्याली’, ‘वक़्त देना ही पड़ता हैं’, ‘सब लिखने के लिए एकांत खोजते हैं’, ‘सन्नाटा’, ‘खबरी के पास चलते हैं’ श्रोताओं द्वारा बहुत पसंद की गयी|

इन सभी के बिच मैं आख़िरकार संदीप शिखर जी ने भी अपनी कुछ रचनायें सुना ही डाली| कुछ पंक्तियाँ जो मुझे काफी पसंद आयी
“समंदर देख्कर्के नदियों का पता नहीं चलता
बड़े शहरो मैं गलियों का पता नहीं चलता ”

“ज़माने से जो बेखबर हो गया हैं
जमाना उस्सी की खबर ढूँढता हैं ”

बिलाल जाफरी जी के बारें मैं बहुत सुना था, और कर्ण कविता मैं उपस्थित उनकी कविता काफी अच्छी थी| आज आमने सामने उन्हें सुनने का मौका मिला| उनकी कविताओं का शीर्षक ‘मैं कुछ लिख रहा हूँ’, ‘तुम्हारी जॉब का क्या हुआ’, ‘उस दिन मैं भी चल बसूँगा’ | तुम्हारी जॉब का क्या हुआ हैं कविता ने दर्शको को हँसा हँसा करके सोचने पर मजबूर कर दिया|

अभिषेक तिवारी जी बेंगलुरु मैं कुछ साल पहले आये थे, तो उन्हें इस शहर का मौसम बड़ा पसंद आया था | इस्सी पर उन्होंने एक कविता लिखी एवं अंजुमन मैं सभी के समक्ष प्रस्तुत किया| अगले आये कवि हैदर जी को मैं ठीक से सुन नहीं पाया, परन्तु उनकी कविता के शीर्षक थे ‘वक़्त’, ‘बातें’ और ‘सपने’ |

अभिनव यादव जी का पढने का बिलकुल मन नहीं था, परंतु उन्होंने भी दर्शको की मांग पर कर्ण कविता मैं छापी अपनी कविता ‘मेरा कमरा’ पड़ दी| शुभम तिवारी जी ने दो कवितायेँ ‘उम्मीदों के बोझ’ और ‘होली’ सुनाई|

इन सबके बाद मुझे सुनाने का मौका मिला| मैं किसी खास मेहमान का इंतज़ार कर रहा था, इसीलिए सबसे अंत मैं सुनाना अच्छा रहा| मैंने दो कवितायेँ सुनान्यी, पहली का शीर्षक कुच्छ नहीं था| पर इसके लिए सुगुना देवन जी धन्यवाद्द देना चाहूँगा, जिनकी tweet पर लिखी २ लाइन से इस कविता का शुभारभ हुआ|


अगली कविता का शीर्षक ‘द्वन्द’ था| इसमें मैंने दिमाग और आत्मा के बिच हो रहे वैचारिक वार्तालाप को दर्शाने की कोशिश की हैं| इस कविता का प्रेरणा स्त्रोत अंकिता अग्रवाल जी के ब्लॉग पर लिखी ८ पंक्तियाँ थी|

इस बार का अंजुमन काफी अच्छा अनुभव रहा, मेर लिए| उम्मीद हैं की आगे मैं आता रहूँगा और ऐसे ही कवितायेँ सुनूंगा और सुनाऊंगा|

चलते चलते

आखिरी मैं सिर्फ इतना कहना चाहूँगा की अगर कोई गलती हो गयी हो, इस महफ़िल के वर्णन में तो माफ़ी चाहता हूँ! अगली बार भी कुछ काव्य पाठ करू और इस अंजुमन की महफ़िल को और भी रंगीन करू!

Disclaimer Event summary is based on the personal experiences of the author, they need not to be true to all the facts.

Link/कुच्छ लिंक :
Event Page: Anjuman, Ek Sham Ghazlon ke Naam (मई मैं हुए अंजुमन की संध्या का पेज)
Facebook Page: Anjuman-Hindu Urdu Poetry Club, Bangalore (अंजुमन हिंदी उर्दू शायरी क्लब का फेसबुक पेज )

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