साइकिलों का शहर जरूरत बस ट्रैक की (City of cycles, just needed a track)

dainik bhaskar

साइकिलिंग के मामले में कोटा देश के लिए नजीर बन सकता है। कोटा के कोचिंग इलाके में ही रोजाना लगभग 50 हजार साइकिल चलती हैं। इससे प्रतिदिन लगभग 7 हजार लीटर पेट्रोल की बचत होती है। इसके बावजूद शहर में कहीं भी साइकिल के लिए डेडिकेटेड ट्रैक नहीं है। पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिहाज से देश-दुनिया के कई बड़े शहरों में भी साइकिलिंग के लिए अलग ट्रैक बने हुए हैं। भास्कर ने इस मुद्दे पर एक्सपर्ट्स से बात की तो सामने आया कि कोचिंग एरिया में साइकिल ट्रैक आसानी से बन सकता है।

Kota can become a shining example for the country in terms of cycling. Around 50,000 people commute daily through cycling in the coaching areas of Kota. It saves approximately 7000 liters of daily. Even then also, there is no dedicated track anywhere in the city for cycles. Many cities in country and abroad have separate cycling tracks to keep environment and health in check. Bhaskar has spoken with experts on this issue and got the conclusion that it is very easy to make a cycle track in coaching areas.

केवल अतिक्रमण हटाने भर से निकल सकता है रास्ता
इसके लिए जितनी जगह चाहिए उतनी जगह तो अतिक्रमियों ने ही दबा रखी है। अधिकारी इस पर थोड़ा सा ध्यान दें तो बिना विशेष खर्चे के ही साइकिल ट्रैक बन सकता है। इससे शहर के पर्यावरण में भी सुधार आएगा।

Track can be made just by removing illegal development on the routes

The space required for the track has been already available but encroachment by many people. If authorities (officers) pay attention to it a bit, then cycle track can be made without any expensive budget. It will also improve environment of the city.

इन इलाकों में संभावना
साइकिलिंग के जानकारों के मुताबिक, नए कोटा में आईएल से अनंतपुरा चौराहा, कॉमर्स कॉलेज से केशवपुरा चौराहा, गोबरिया बावड़ी से घटोत्कच सर्किल, तलवंडी से ओपेरा रोड, केशवपुरा चौराहे से सीएडी, मोदी कॉलेज चौराहे से जवाहर नगर एयरपोर्ट की दीवार तक डेडिकेटेड साइकिल ट्रैक बनाए जा सकते हैं। मानकों के अनुसार साइकिल ट्रैक 1.5 से 2 मीटर का होना चाहिए। इन सभी सड़कों पर इतनी जगह है और यही वह इलाका है, जहां कोचिंग छात्रों का आवागमन ज्यादा है। इन सभी सड़कों पर साइकिल ट्रैक जितनी जगह तो दोनों ओर अतिक्रमियों ने ही दबा रखी है। इन्हें हटाकर भी ट्रैक डेवलप किए जा सकते हैं।

Probable areas

According to experts, in new Kota, dedicate cycle track can be made from IL to Anantpura Circle, Commerce college to Keshavpura circle, Gobriya bawari to Ghatokatch circle, talwandi to opera road, Keshavpura cirlce to CAD and from Modi college to Jawahar nagar airport wall. According to standards, cycle track must be 1.5 to 2 meter wide. All the roads have this much space available and these are areas where coaching students are commuting in large numbers. In all those roads, the space equivalent to developing cycling track has already been occupied illegally. Tracks can be developed just by removing those illegal construction.

यूं रोज बचाते हैं पांच लाख रुपए
कोटा शहर में मोटे अनुमान के तौर पर 70 हजार साइकिलें है। प्रत्येक साइकिल का रोज का न्यूनतम 5 किमी भी माना जाए तो 3.5 लाख किमी साइकिल रोजाना चलती हैं। किसी वाहन का 50 किमी प्रति लीटर का भी एवरेज माना जाए तो इस साइकिलिंग से रोजाना 7 हजार लीटर पेट्रोल की बचत हो रही है जिससे लगभग पांच लाख की बचत होती है। शहर की हवा में रोजाना भारी मात्रा में प्रदूषित गैसें घुलने से बच रही हैं। नियमित साइकिलिंग से जुड़े लोग बताते हैं कि इसे प्रमोट किया जाए तो साइकिल चलाने वालों की संख्या और भी बढ़ सकती है।

Daily savings of Rs. 500,000
According to a rough estimate, Kota city has approximately 70 thousands cycle. If it is assumed that every cycle on an average commute 5 km daily, then all the cycles are traveling a distance of around 350,000 km. Assuming 50 km per liter an average for a vehicle, then everyday cycling is saving 7000 liters of petrol, resulting in savings of 500,00 rupees. Lot of polluting gases are avoided being mixed into the air of city. People belonging to regular cycling tells that if promoted, number of bicyclers will increase tremendously.

साइकिलिंग में हम काफी आगे, फिर ट्रैक के मामले में पीछे क्यों?
कोटा शहर में साइकिलिंग को प्रमोट करने के लिए पिछले चार साल से साइक्लोट्रोट्स क्लब बना हुआ है। क्लब से करीब 200 सदस्य जुड़े हुए हैं। अध्यक्ष चंद्रेश शर्मा बताते हैं कि गुड़गांव, नोएडा, दिल्ली, हैदराबाद, बेंगलुरु समेत गुजरात के कई बड़े शहरों में साइकिल ट्रैक बने हुए हैं। जबकि आबादी के अनुपात में इन शहरों में साइकिल चलाने वाले कोटा से कम ही होंगे। मोटे तौर पर कोटा शहर में 10 फीसदी लोग साइकिल चलाते हैं। भले ही इसमें बड़ा हिस्सा कोचिंग छात्रों का है। हम इस मुद्दे पर प्रशासन से बातचीत करने के लिए तथ्यात्मक तैयारी भी कर रहे हैं। प्रयास सिर्फ इतना करना है कि सड़कों के किनारों से अतिक्रमण हट जाए। बस, इतने में साइकिल ट्रैक के लिए जगह निकल आएगी। एक बार ट्रैक शुरू हुए, फिर लोग खुद ही ट्रैक खाली छोड़ देंगे।

Ahead in cycling, then why behind on tracks?

A club has been formed from past 4 years to promote cycling in Kota. Currently, the club has around 200 members. President Chandresh Sharma told that Gurgaon, Noida, Delhi, Hyderbad, Bengaluru and many cities of Gujrat has cycling tracks, that too when they do not fair well in ratio wise for the number of people cycling. Around ten percent of the people are driving cycles in Kota, even if the major portion belongs to the coaching students. We are also trying to speak with administration on this matter. Just needed an effort to remove illegal construction around the roads. Just by doing so, give free space for the tracks. Once the track start, people will automatically leave the track.

कोपनहेगन: वहां 20-25 किमी साइकिल चलाना आम है

साइकिलिंग को लेकर हमने बात की कोटा के रहने वाले अंकित खंडेलवाल से, जो करीब तीन साल तक पढ़ाई के सिलसिले में डेनमार्क की राजधानी कोपनहेगन रहकर आए हैं। यह महानगर साइक्लिंग के लिए मशहूर है और यहां की 35 से 40 प्रतिशत आबादी साइकिल पर ही सफर करती है। अंकित बताते हैं कि वहां 20 से 25 किमी साइकिल चलाना बिल्कुल नहीं अखरता। मैं खुद रोज इतनी साइकिल चला लेता था। कभी थकान नहीं होती थी। क्योंकि साइकिल के लिए वहां हर सड़क के साथ अलग से बेहतरीन ट्रैक बने हुए हैं।

Copenhagen: It is normal to cycle 20-25 km cycle daily

We have spoken to Ankit Khandelwal regarding cycling. He is by native from Kota and stayed in the capital of Denmark for approximately 3 years during his studies. This city is famous for cycling and around 35-40% of city population travel on cycle. Ankit has told, that driving 20-25 km through cycle is not uncomfortable. Even I have used cycle that much on daily basis. Never got tired, because special tracks have been made for cycling alongside roads.

साइकिल पार्किंग के लिए घर, बाजार, रेलवे व मेट्रो स्टेशन पर खास इंतजाम होते हैं। यहां तक कि मेट्रो में भी साइकिल रखने के लिए अलग से डिब्बा होता है। बड़े-बड़े उद्यमी, राजनेता और कई कंपनियों के सीईओ तक को मैंने वहां साइकिलों पर आते-जाते देखा। कोटा में साइकिलिंग को प्रमोट किया जा सकता है, क्योंकि यहां हजारों बच्चे पहले से इसका यूज कर रहे हैं।

Special arrangement has been made at home, market, railway and metro to park cycles. Even metros have separate coaches to park cycles during the travel. Many businesspersons, politicians and other people were seen using cycle very frequently. Cycling can be promoted in Kota, because already thousands of youngsters are using it.

(Appeared in Dainik Bhaskar, Kota edition, 05-07-2015)

Inspiration for this article came from Designing Cities Assignment-3, a MOOC course from University of Pennsylvania. I have taken this course as part of my Zero Cost MBA (Envisioning 21st century global manager project. Check the last 2 pages of this assignment

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