ऑनलाइन शिक्षा की बढ़ी लाइन

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राजस्थान में कोटा के रहने वाले अंकित खंडेलवाल ने मई, 2012 से करीब दो साल तक अपने अंतरराष्ट्रीय प्रबंध परियोजना पर काम किया। हालांकि खंडेलवाल को इसके लिए किसी नियमित बिजनेस स्कूल जाने की जरूरत नहीं पड़ी। इसके बजाय उन्होंने हार्वर्ड, स्टैनफर्ड और मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्रोलॉजी (एमआईटी) जैसे बेहतरीन विश्वविद्यालयों के नि:शुल्क ओपेन ऑनलाइन पाठ्यक्रमों (एमओओसीएस) और ओपेन कोर्स वेयर (ओसीडब्ल्यू) का प्रयोग किया, जहां तक पहुंचने के लिए कोर्सेरा और एडेक्स के प्लेटफॉर्म की मदद ली।

22 महीनों की अवधि में खंडेलवाल ने 20 से भी अधिक एमआईटी पाठ्यक्रमों की सामग्री पढ़ी जिसमें व्यापार वार्ता, विलय एवं अधिग्रहण, वित्तीय लेखांकन सहित अन्य विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम शामिल हैं। खंडेलवाल ने बताया, ‘वैश्विक स्तर पर काम करने वाले लोगों के साथ काम करने के लिए मुझे भी वैश्विक बनाने की जरूरत थी। इसलिए मैंने रूस, चीन, जापान और मध्य एशिया के ओसीडब्ल्यू पाठ्यक्रमों को पढऩा शुरू किया। वर्ष 2012 में शुरुआत के साथ ही एडएक्स संभवत: इसी ओर निशाना साध रहा था। दो विश्वविद्यालयों के साझेदारी के साथ शुरू करने वाले एडएक्स के पास फिलहाल 60 सहयोगी संस्थान, 300 विभिन्न प्रकार के पाठ्यक्रम और 30 लाख छात्र-छात्राएं हैं जिनमें से करीब 10 फीसदी छात्र भारतीय हैं।

एडएक्स के सीईओ अनंत अग्रवाल ने कहा, ‘जब 2 साल पहले हमने पहली बार एडएक्स की शुरुआत की थी तब हमें इससे क्या उम्मीद करनी है इसके बारे में कुछ भी पता नहीं था। अब भी जब विश्वभर के कई संस्थान और लाखों छात्र-छात्राएं इससे जुड़ चुके हैं हमारे पास ऑनलाइन शिक्षा के मद्देनजर सीखने के लिए काफी कुछ है। जैसे-जैसे कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को इसका प्रभाव देखने को मिलेगा वैसे ही हमें पाठ्यक्रम में उल्लिखित कक्षाओं में और अधिक विभिन्नता देखने को मिलेगी।’ मई 2012 में एमआईटी और हार्वर्ड विश्वविद्यालय द्वारा एडएक्स की स्थापना के बाद एडएक्स ओपन सोर्स का इस्तेमाल करते हुए फ्रांस, चीन और जापान ने अपने राष्ट्रीय स्तर का बुनियादी ढांचा तैयार किया।

भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने महत्त्वाकांक्षी युवा छात्र-छात्राओं के लिए उच्च शिक्षा के तहत ऑनलाइन शिक्षा कार्यक्रम एसडब्ल्यूएवाईएएम पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय और अमेरिकी विदेश विभाग ने एक संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करने की मंजूरी दी। एसडब्ल्यूएवाईएएम प्लेटफॉर्म सर्वर भारत में रहेगा और विभिन्न अमेरिकी विश्वविद्यालयों को इस प्लेटफॉर्म के जरिए कई अमेरिकी विश्वविद्यालयों को भी स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए बुलाया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि ओपेन एडएक्स के जरिए ऐसा किया जाएगा। एडएक्स के साथ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबई, भारतीय प्रबंध संस्थान, बेंगलूर और बिट्स पिलानी जैसे संस्थान साझेदार के रूप में जुड़े हुए हैं। अग्रवाल ने बताया कि एडएक्स कई अन्य बिजनेस स्कूलों और स्कूलों से अपनी पहुंच और साझेदारी बढ़ाने के लिए बातचीत कर रहा है।

एडएक्स ने अपनी हाईस्कूल पहल के जरिए स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में कदम रखा था। एडएक्स ने इस कार्यक्रम के तहत विश्वभर के हाईस्कूल स्तर के छात्रों के लिए 27 नए पाठ्यक्रमों को पेश किया गया है। एडएक्स हाईस्कूल एमओओसी को दुनिया के कई जाने-माने विश्वविद्यालयों द्वारा विकसित किया गया है जिसमें यूसी बार्कली, राइस और एमआईटी शामिल है। इसके अलावा कई नए पाठ्यक्रमों को भी शामिल किया गया है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हाई स्कूल छात्रों को माध्यमिक की बाद की पढ़ाई के लिए उच्च स्तरीय और इंटरैक्टिव पाठ्यक्रम के साथ तैयार करना है। इसके अलावा एडएक्स अपने छात्रों को विभिन्न शुल्क पर आधारित विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए एक सत्यापित प्रमाण पत्र भी प्रदान करता है। 0.4 फीसदी भारतीय छात्र इसका लाभ उठाते हैं। पहले कुछ दिनों तक नि:शुल्क शिक्षा प्रदान करने के बाद एडएक्स पेड पेशेगत शिक्षा प्रदान करना शुरू करता है। अग्रवाल से मिली जानकारी के अनुसार इस शिक्षा में कॉरपोरेट प्रशिक्षण भी दिया जाता है।

एडएक्स का बिग डेटा पर आधारित अपना एक पॉयलट पेड पाठ्यक्रम है जिसका शुल्क 500 डॉलर है और 3,500 छात्रों के समूह में से करीब 141 भारतीय छात्र इसका हिस्सा है। यह पाठ्यक्रम एमआईटी द्वारा करवाया जाता है। हालांकि एमओओसी पाठ्यक्रम की सफलता थोड़ी कम है। जानकारी के अनुसार 90 प्रतिशत लोग भी इस ऑनलाइन कक्षाओं को करने में असफल रह जाते हैं। एडएक्स द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार काफी लंबे समय तक चलने वाले पाठ्यक्रमों में 56 फीसदी छात्रों की दिलचस्पी खत्म हो जाती है और उनकी शिक्षा अधूरी रह जाती है जबकि एडएक्स अपने सभी पाठ्यक्रमों को छोटी अवधि में विश्वभर के बेहतरीन प्रोफेसरों की मदद से पूरा करता है।

अग्रवाल ने बताया कि कई पाठ्यक्रमों में तो छात्रों की दिलचस्पी इतनी बढ़ जाती है कि उसे 80 प्रतिशत तक छात्र पूरा करते हैं। पाठ्यक्रम के पूरा होते ही छात्रों को एक सत्यापित प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है। एडएक्स की तरह ही दूसरे एमओओसी कोर्स कराने वाले शिक्षण संस्थान भी छात्रों को बेहतरीन अवसर प्रदान कर रहे हैं। एडूरेका की सह-संस्थापक लवलीन भाटिया ने कहा कि छात्रों में ऑनलाइन शिक्षा का प्रभाव बढ़ा है। इससे शिक्षा प्रणाली पर भी अच्छा असर पड़ रहा है। ऑनलाइन शिक्षा में कई प्रकार के प्रशिक्षण दिया जाता है जिसमें विडियो सेशन भी होता है।

भाटिया के अनुसार ऑनलाइन शिक्षा में इंटरैक्टिव सेशन, सभी पाठ्यक्रमों के लिए विशेषज्ञ मार्गदर्शन, व्यावहारिक अनुभव के लिए परियोजनाएं, पाठ्यक्रम का 24*7 उपलब्ध होना जैसी चीजें उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन शिक्षा लेने वाले करीब 4 फीसदी छात्रों को आईटी पेशे में देखा जाता है। पिछले साल एडूरेका ने 20 गुना अधिक यूजर्स और 50 गुना अधिक वेबसाइट देखने वालों की संख्या दर्ज की थी। भारत में एडूरेका का 88 फीसदी बाजार है लेकिन इसका 65 फीसदी राजस्व विदेशों से आता है।

(Appeared in Business Standard, Hindi, 12.10.2014)

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